नमस्कार दोस्तों,

मुझे उम्मीद है कि सब लोग कुशल -मंगल होंगे, आज मैं एक मुद्दे पर Discussion करूँगा और वो मुद्दा है कि ”धात रोग (धात गिरने के क्या नुकसान है ????)

पतले वीर्य पानी वीर्य रूप में भी जाना जाता है। ज्यादातर पुरुष वीर्य पतली या मोटी है या नहीं उसके बारे में बहुत चिंता है। दिलचस्प है, वहाँ कोई शोध का विचार है कि मोटाई या दुबलापन वीर्य के साथ प्रजनन क्षमता या कुछ भी करने के लिए कुछ वापस करने के लिए है। 3.7 एमएल के परीक्षण के लिए मानक मतलब बोल पड़ना की मात्रा है, और यहां तक कि अगर यह नीचे 1.5 मिली लीटर होता है सामान्य माना जाता है। इसका मतलब है कि यहां तक कि वीर्य का एक चम्मच के ज्यादातर मामलों में सामान्य है। यह सूचना हो सकता है कि आप अपने लिंग से बाहर आ रहा है जब आप यौन उत्तेजित कर रहे हैं-यह अपने लिंग की नोक पर सही है एक पदार्थ को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। संभोग के दौरान स्नेहन तरल पदार्थ प्रदान करता है। कई लोगों को यह पानी वीर्य के रूप में ले, लेकिन इसमें हमेशा शुक्राणु नहीं होते। वहाँ पतले वीर्य के दो सामान्य कारण हैं: कम शुक्राणु गिनती और फ्रुक्टोज की कमी।  वीर्य के thinness एक आदमी की उम्र या यौन गतिविधि के अपने वर्तमान स्तर पर निर्भर करते हैं।  लेकिन यह किसी भी व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं होती है। पतले वीर्य का सबसे आम कारण एक फ्रुक्टोज की कमी है।  सभी बोल पड़ना का लगभग आधा है बना के फ्रुक्टोज, एक चीनी।  फ्रुक्टोज बोल पड़ना लाभदायक vesicle के माध्यम से प्रवेश करती है।  एक आहार कम चीनी और कार्बोहाइड्रेट में हालत के लिए योगदान देता है।  यह जल्दी से कार्बोहाइड्रेट/चीनी की खपत में वृद्धि से remedied है। दैनिक हस्तमैथुन या सेक्स उपलब्ध प्रत्येक स्खलन के दौरान वीर्य की मात्रा कम कर देता है।  हालांकि इस मामले में एक आदमी के शुक्राणुओं की संख्या कम है, यह में कोई रास्ता नहीं पुरुष बांझपन के लिए से संबंधित है। यदि अंडकोष उच्च तापमान को उजागर किया जा रहा हैं, यह आपके शुक्राणु  patla कर देगा।  अंडकोष का तापमान वृद्धि तंग कपड़ों की वजह हो सकता है

जब भी किसी पुरुष के मन में काम या सेक्स की भावना बढ जाती है! तो लिंग अपने आप ही कड़ा हो जाता है और उसका अंग  उत्तेजना की अवस्था में आ जाता है! इस अवस्था में व्यक्ति के लिंग से पानी के रंग के जैसी पतली लेस के रूप में निकलने लगती है! लेस बहूत कम होने के कारण ये लिंग से बाहर नहीं आ पाती है, लेकिन जब व्यक्ति काफी अधिक देर तक उत्तेजित रहता है तो ये लेस लिंग के मुहँ के आगे आ जाती है!

आज के युग में अनैतिक सोच और अश्लीलता के बढ़ने के कारण आजकल युवक और युवती अक्सर अश्लील फिल्मे देखते और पढते है तथा गलत तरीके से अपने वीर्य और रज को बर्बाद करते है! अधिकतर लड़के-लड़कीयां अपने ख्यालों में ही शारीरिक संबंध बनाना भी शुरू कर देते है! जिसके कारण उनका लिंग अधिक देर तक उत्तेजना की अवस्था में बना रहता है, और लेस ज्यादा मात्रा में बहनी शुरू हो जाती है! और ऐसा अधिकतर होते रहने पर एक वक़्त ऐसा भी आता है! जब स्थिति अधिक खराब हो जाती है और किसी लड़की का ख्याल मन में आते ही उनका लेस (वीर्य) बाहर निकल जाता है, और उनकी उत्तेजना शांत हो जाती है! ये एक प्रकार का रोग है जिसे शुक्रमेह कहते है! वैसे इस लेस में वीर्य का कोई भी अंश देखने को नहीं मिलता है! लेकिन इसका काम पुरुष यौन-अंग की नाली को चिकना और गीला करने का होता है  जो सम्बन्ध बनाते वक़्त वीर्य की गति से होने वाले नुकसान से लिंग को बचाता है!

धात रोग का प्रमुख कारण क्या है?????

  • अधिक कामुक और अश्लील विचार रखना!
  • मन का अशांत रहना!
  • अक्सर किसी बात या किसी तरह का दुःख मन में होना!
  • दिमागी कमजोरी होना!
  • व्यक्ति के शरीर में पौषक पदार्थो और तत्वों व विटामिन्स की कमी हो जाने पर!
  • किसी बीमारी के चलते अधिक दवाई लेने पर
  • व्यक्ति का शरीर कमजोर होना और उसकी प्रतिरोधक श्रमता की कमी होना!
  • अक्सर किसी बात का चिंता करना
  • पौरुष द्रव का पतला होना
  • यौन अंगो के नसों में कमजोरी आना
  • अपने पौरुष पदार्थ को व्यर्थ में निकालना व नष्ट करना (हस्तमैथुन अधिक करना)

धात रोग के लक्षण क्या है???

  • मल मूत्र त्याग में दबाव की इच्छा महसूस होना! धात रोग का इशारा करती है!
  • लिंग के मुख से लार का टपकना!
  • पौरुष वीर्य का पानी जैसा पतला होना!
  • शरीर में कमजोरी आना!
  • छोटी सी बात पर तनाव में आ जाना!
  • हाथ पैर या शरीर के अन्य हिस्सों में कंपन या कपकपी होना!
  • पेट रोग से परेशान रहना या साफ़ न होना, कब्ज होना!
  • सांस से सम्बंधित परेशानी, श्वास रोग या खांसी होना!
  • शरीर की पिंडलियों में दर्द होना!
  • कम या अधिक चक्कर आना!
  • शरीर में हर समय थकान महसूस करना!
  • चुस्ती फुर्ती का खत्म होना!
  • मन का अप्रसन्न रहना और किसी भी काम में मन ना लगना इसके लक्षणों को दर्शाता है!